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बिहार विधानसभा में स्वास्थ्य पर बड़ा एलान: अब विधायकों और कर्मचारियों को मिलेगा कैशलेस इलाज

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पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार को बड़ा और तत्काल फैसला लेना पड़ा। सदन में बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के दबाव के बाद राज्य सरकार ने घोषणा की कि अब बिहार में विधायकों, विधान पार्षदों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। इस फैसले से राज्य के लगभग 10 लाख सरकारी कर्मचारी और उनके आश्रित सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।प्रश्नकाल के दौरान राघवेंद्र प्रताप सिंह ने मौजूदा रीइंबर्समेंट व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए कैशलेस इलाज लागू करने की मांग उठाई। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पहले इस मुद्दे पर बैठक कराने की बात कही, लेकिन विधायक इस पर अड़ गए। जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा कि जब सरकार खुद सदन में मौजूद है तो फैसले के लिए बैठक की जरूरत क्यों। बढ़ते दबाव और सदन के माहौल को देखते हुए सम्राट चौधरी ने वहीं खड़े होकर कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू करने का एलान कर दिया।अब तक बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए इलाज के बाद बिल भुगतान की व्यवस्था थी, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कैशलेस इलाज की व्यवस्था को जल्द लागू किया जाएगा और एक सप्ताह के भीतर इसकी रूपरेखा तय करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक होगी।स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने को लेकर सदन में एक और बड़ा संकेत तब मिला, जब मेडिकल कॉलेजों के मुद्दे पर सरकार ने पीपीपी मॉडल अपनाने की बात कही। सहरसा से विधायक आईपी गुप्ता के सवाल पर डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि बिहार में नए मेडिकल कॉलेज पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर खोले जाएंगे। उन्होंने बताया कि बेतिया और मधेपुरा जैसे मेडिकल कॉलेजों में संसाधन देने के बावजूद डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, इसी वजह से सरकार पीपीपी मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रही है।डिप्टी सीएम ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती से रोक लगाने के लिए नई नीति लाई जाएगी, ताकि सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।वहीं सीएचसी की स्थिति को लेकर झंझारपुर से बीजेपी विधायक नीतीश मिश्रा ने जब प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी से सवाल किया तो मंत्री जवाब देने में उलझते नजर आए। डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ की संख्या पर संतोषजनक उत्तर न मिलने से सदन में ठहाके गूंज उठे। स्थिति बिगड़ती देख डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में कई पद स्वीकृत किए गए हैं और जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।लगातार सवालों और विधायकों के दबाव के बीच सरकार ने यह साफ कर दिया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार उसकी प्राथमिकता है। कैशलेस इलाज की घोषणा और पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला सरकार के उसी रुख को दर्शाता है।अगर आप चाहें तो मैं इसी खबर के लिए तीखी हेडलाइन, फेसबुक शॉर्ट वर्जन या अखबारी फ्रंट-पेज स्टाइल इंट्रो भी तुरंत तैयार कर दूँ।

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